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Thursday, September 30, 2010

Fw: bhaagy


बीज सदैव धरती के भीतर होता है। वह कभी दिखाई नहीं देता लेकिन उसी के भीतर से एक विशाल वृक्ष का सृजन होता है। यदि एक स्वप्न एक आशा का बीज आप अपने मन में उत्पन्न कर लें और निरन्तर उसे पोषण प्रदान करें तो एक न एक दिन वह अवश्य ही उपलब्धि बनकर आपके पास खडा़ हो जाएगा।

 
परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज  


A seed is always found under the ground and not visible to the eye.  With care and nourishment a seed can develop and grow into a huge tree. If you can generate a seed consisting of one dream or one hope and constantly nurture that seed, then one day it can definitely become a large achievement, visible to all.

( Please do share with friends. It is a good thing to do.)

Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


 

Saturday, September 25, 2010

दोनों का मिलन ही भाग्य है

Sent: Thursday, September 16, 2010 7:38 AM
Subject: अमृत वचन
भाग्य क्या है ? अवसर और तत्परता, दोनों का मिलन ही भाग्य है। जो अवसर को पह्चान ले और तत्परता से पकड़ ले, बस समझ लीजिए भाग्य हाथ में आ गया। अवसर को ढूढिए, अवसर को पहचानिए और तत्परता से फ़ायदा उठI लीजिए, नहीं तो वो लौट के आने वाला नहीं है। 
परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज   
What is destiny ? The combination of opportunity and eagerness is destiny. Those who can identify an opportunity and take advantage of it with eagerness, can reach their full potential and their destiny. Search for opportunities, recognize them and take advantage of them with eagerness because once an opportunity is gone it will not come back.

Translated by Humble Devotee
Praveen Verma

Guruvar ka Jaipore progmm

----- Original Message -----
From: mggarga
Sent: Saturday, September 25, 2010 11:50 AM
Subject: Fw: Re:

Sent: Saturday, September 18, 2010 11:53 AM
Subject: Guruvar ka Jaipore progmm.
Guruvar will come atJaipur On 8th oct 10.  Parvachan will be from 8th oct to 10thoct 10.
Time-
Date                   Morning                   Evening
8.10.2010        ---------                    5.30 to 8.00 
9.10.2010        8.30 to 11.00             5.30 to 8.00 
10.10.2010      8.30 to 11.00             5.30 to 8.00  
Venue-  JAI UDHYAN OPP. GOVINDDEVJI MANDIR JAIPUR   
          


दूसरों के दोष ढूंढने में

----- Original Message -----
From: vjm na
Sent: Friday, August 20, 2010 2:26 AM
Subject: अमृत वचन

दूसरों के दोष ढूंढने में अपनी शक्ति का अपव्यय मत करो। अपने आप को ऊँचा उठाने का हर सम्भव प्रयास जारी रखो, उसे कम न होने दो।

हर किसी में अच्छाई को ढूंढो, उससे कुछ सीखकर अपना ज्ञान और अनुभव बढाओ। इससे तुम बहुत जल्दी ऊँचाई तक पहुँच सकते हो।



परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज  



Do not waste your energy in finding faults in others.  Instead, make every possible effort to stand out or shine yourself.

Find excellence in everybody. Using the knowlege you gain from this mindset, you can reach great heights in a short amount of time
.



Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


VJMNA
Chicago, IL

आदमी का अन्तःकरण स्वच्छ

----- Original Message -----
From: vjm na
Sent: Thursday, August 26, 2010 7:42 PM
Subject: अमृत वचन

आदमी का अन्तःकरण स्वच्छ होना चाहिए । यदि हम खुद अच्छे हैं तो दुनिया अच्छी है। यदि हम बुरे हैं तो दुनिया हमारे लिए बुरी ही साबित होगी। दूसरों की अच्छाई तो देखो पर बुराई न देखो, वरना दुनिया हमारे लिए बुरी ही होगी।


परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज  

A person's conscious should be clear and clean. If we are good then the world is good. And if we are bad then the world will prove to be bad for us. Be good and see goodness in others, this will ensure a good world for all.

Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


VJMNA
Chicago, IL

Fw: अमृत वचन

 
----- Original Message -----
From: vjm na
Sent: Thursday, September 02, 2010 10:40 PM
Subject: अमृत वचन

जीवन की सम्पूर्णता है आनन्द और आनन्द परमात्मा का ही एक रूप या एक नाम है जिसे सच्चिदानन्द कहा जाता है। हमारा जन्म परमात्मा से मिलने के लिए ही हुआ है और इसी उद्देश्य को लेकर हम दुनियाँ में आए हैं । वस्तुतः जीवन एक अवसर है परमात्मा से मिलने के लिए।  

 

परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज  

 
Life's completeness is bliss and bliss is one of the God's name and form which is called "existence-consciousness-bliss" .  The purpose or goal of our birth is to unite with God.   To fulfill this goal, we must lead a complete life and ulitize our opportunity to unite with God. 
 

 
Translated by Humble devotee
Praveen Verma


VJMNA
Chicago, IL


Fw: अमृत वचन



Sent: Thursday, September 23, 2010 6:39 AM
Subject: अमृत वचन

जीवन संगीत है। सुर से बजाओगे तो बहुत अच्छा है, मधुर है और अगर सुर से भूल गए तो शोर है जीवन
और उसको खुद भी नहीं सुन पाओगे दूसरे तो क्या सुनेगें ।

परम पूज्य सु्धांशुजी महाराज  


Life is filled with music. When the music is in tune, life is melodious and sweet. However, when the music is out of tune it just becomes noise. No one will be able to listen, not even you.
Life is a challenge. Everyday we face new challenges. When we face a challenge with courage, we benefit from the rewards we reap.


Translated by Humble Devotee
Praveen Verma





जीवन है चुनौती । नित नई नई चुनौती बनकर सामने आती हैं । जब आप बहादुर होकर चुनौती को स्वीकार करते हैं
तो वो कुछ न कुछ देकर ही जाएँगी, कुछ लाभ देंगी ।

Wednesday, September 15, 2010

satsang in Mumbai


Good News

Satsang of Guruji finalised in mumbai from
 9th Dec to 12th Dec

Nischit

Mggarga

Friday, September 10, 2010

गुरू का नाम जपता जा




गुरू का नाम जपता जा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू का मंत्र जपता जा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू से नेह बढ़ा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू को ह्रदय में बैठा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू चरणों में ध्यान लगा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू बाणी में रम जा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू को मन में बसा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू सेवा में देह लगा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू कार्य में धन लगा तेरे पाप कटेंगे !

गुरू धाम के दर्शन कर तेरे पाप कटेंगे !

कहे मदन गोपाल तू गुरू का कहना मान मेरे भाई

तेरे पाप कटेंगे !

Saturday, September 4, 2010

Fw: Guruji aagami programes








Subject: Guruji aagami programes




October 8-10 Jaipur Rajasthan
October 20-24 Ganesh Laxmi Yagya A D Ashram Delhi
22 october 2010 purnima darshan
27 to 31 october 2010, Ludhiana,Punjab
17 to 21 november 2010,Bhopal,Madhya Pradesh Purnima darshan
1 to 5 december 2010 ,Chandigarh,haryana
10 to 12 December 2010,Mumbai, Maharashtra.
24 to 26 December ,2010, kolcatta,west Bengal
6 to 9 January,2011 , Nagpur Maharashtra.
21 to 23 Januart 2011, Haiderabad,Andhra Pradesh.
28 to 30 Jan.2011 ,Surat Gujrat.







Friday, September 3, 2010

Fw: [GURUMATA] बेटी के सुखी जीवन के लिए

 
----- Original Message -----
Sent: Thursday, September 02, 2010 3:51 PM
Subject: [GURUMATA] बेटी के सुखी जीवन के लिए

बेटी के सुखी जीवन के लिए
* ससुराल पक्ष के लोग और उसके पति को उनकी आदतें,
स्वभाव , रुचियाँ समझने और उनके साथ तालमैल मिलाने का अवसर है !
* हर बात में बेटी का पक्ष न लें ! उसे त्याग ,समर्पण ,सहयोग ,
एवं प्रत्येक के साथ मधुर व्यवहार की शिक्षा दें !
* ससुराल वाले बहू को बेटी मानें यह बहुत अच्छा हे लेकिन
बहू ससुराल में स्वंय को बेटी मानने की भूल कभी न करे !
*क्योकि बेटी अपने माता पिता के घर में माता-पिता और भाइ -बहन इत्यादि से अपेक्षा और अपने कार्य के प्रति उपेक्षा रखे तो चलता है लकिन ससुराल में यही अपेक्षा और उपेक्षा भारी कष्ट का कारण बनती है !
* अगर किसी से कोई कठोर बात कहने की आवश्यकता पडे यो उसे मधुर शब्दों में ही कहना चाहिए !
* पति के घर में सबकुछ पिता के घर जैसा कभी नही होता !
इसलिए बेटी को ससुराल में ससुराल की परिस्थितियां ,वहां क्र अभाव -प्रभाव ,लोकरीति,व्यवहार ,रीति तथा कुल परम्पराओं के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा दें !
*अगर कोई अच्छी बात अच्छी आदत को बेटी वहां के लोगों में
डालना चाहती हे तो बडी सावधानी ,धैर्य एवं धीरे धीरे और उसका स्वयं आचरण करके प्रारंभ करे अन्यथा वहां के लोगो का अहंइसे सहन नहीं कर पायेगा!
*पति को उसके माता पिता ,भाई बहन के प्रति दायित्वों से विमुख करने का प्रयास कभी न करें इससे मनों में कटुता आती है !
*स्त्री पर तीन कुलों के निर्माण का दायित्व होता है उसे इस गरिमा को कभी नहीं भूलना चाहिए !
*इस महान कार्य की पूर्ति वह प्रेम ,सहनशीलता सदव्यवहार ,सदाचरण एवं त्यागपूर्ण जीवन से ही कर सकती हैं !
धर्मदूत जुलाइ 2010 से !


--
Madan Gopal Garga द्वारा GURUMATA के लिए 9/02/2010 03:48:00 PM को पोस्ट किया गया