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Friday, July 23, 2010

गुरु वाणी


प्रभु के नाम के संकीर्तन और भजन की महिमा महान है, अपरम्पार होती है। उसकी मस्ती को शब्दों में व्यक्त कर पाना नामुमकिन है।
श्री सुधान्शुजी महाराज

Monday, July 19, 2010

गुरु वाणी


मति चार प्रकार की होती है। सुमति, कुमति, दुर्मती और महामति। मेरा फायदा हो या न हो, दुसरे का अवश्य होना चाहिए, यह सुमति है। मेरा फायदा न हो तो दुसरे का भी न हो, यह कुमति है। मेरा कोई लाभ नहीं परन्तु दुसरे का नुक्सान अवश्य होना चाहिए , यह दुर्मती है। और महामति होती है की मेरा भले ही नुकसान हो किन्तु दुसरे का फायदा अवश्य होना चाहिए यह देवताओं की मति है।
परम पूज्य श्री सुधान्शुजी महाराज

Saturday, July 17, 2010

धन कैसे कमाएं

धन कैसे कमाएं
१] ध्यान रखें धन पाप की कमाई का न हों !
२] ध्यान रखें धन कमाने मैं आपकी सेहत न खराब हों जाए !
३] ध्यान रहे धन कमानें मैं आपके रिशते न ख़तम हों जाएं !
४] ध्यान रहे धन कमाने मैं आप धन के चौकीदार बन कर न रह जाएं !
५] ध्यान रहे धन को अच्छे काम मैं खर्च करना भी आना चाहिए !
६] ध्यान रहे धन कमाते कमाते आपकी नीद खराब न

Wednesday, July 14, 2010

गुरु महिमा


ब्रम्हारंध्र में एक ऐसा कमल स्थापित है, जिसका मुख नीचे को है, और उसके पंकज पर सतगुरु विराजमान हैं, जो अपने शिष्य को जीवन में कुशलता और सफलता से चलने के लिए सदा प्रेरित करते हैं।

Monday, July 12, 2010

गुरु वाणी

ध्यान योग की अनूठी अध्यात्मिक राह पर चलने के लिए मनुष्य को तीन कृपाओ की परम आवश्यकता होती है। प्रथम ईश्वरीय कृपा, द्वितीय गुरु कृपा और तृतीय स्वयं की स्वयं पर कृपा।

sadguru shri sudhanshuji maharaj

Wednesday, July 7, 2010

गुरु वाणी


जब भक्त भगवान् के भाव में भीग जाता है फिर उसे समय का चक्र भी चकमा नहीं दे सकता, समय की परिधि भी उसके प्रेमभाव को कम नहीं कर सकती और फिर प्रभु ही उसके योग-क्षेम का वहन करते हैं।

गुरुपुर्णिमा




आज फर्ज बनता है मेरा ,गुरुदर पर जाने का !
खुशियाँ मिली अपार जहां से ,उस दर पर शीष झुकाने का !!
गुरुपुर्णिमा का पर्व ,वर्ष मैं एक बार आता है !
गुरु शिष्य के सम्मिलन पर ,इश्वर भी अमृत बरसाता है !!
यह स्वर्णिम शुभ अवसर है ,गुरु शरणागत होने का !
खुशियाँ मिली अपार जहां से ,उस दर पर शीष ज्गुकाने का !!
जीवन संचेतना जुलाई २०१०

Thursday, July 1, 2010

प्रार्थना


प्रार्थना मैं तुम्हें सच्ची प्रसन्नता और सच्ची खुशी की अनुभूति होगी ! इसलिए नित्ये निरंतर नियमपूर्वक प्रार्थना किया करो !